सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने भी की थी रक्षामंत्री से मुलाकात, जयपुर गए कैंट बोर्ड के सीईओ राजीव श्रीवास्तव अपने ढाई साल के कार्यकाल में नहीं छोड़ पाए अच्छी छांप!

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लगभग ढाई साल के अपने कैंट बोर्ड के सीईओ के विवादित कार्यकाल के उपरांत सीईओ राजीव श्रीवास्तव का आखिर जयपुर कमांड में तैनाती हो गई। वैसे तो हर अफसर यह सोचकर कार्यभार ग्रहण करता है कि उसका कार्यकाल अच्छा रहेगा। ओर यहां रहते हुए तथा जाने के बाद भी नागरिक उसे याद रखेंगे। लेकिन राजीव श्रीवास्तव के मामले में यह बात बिल्कुल ही गलत साबित हो रही है क्योंकि महानिदेशक रक्षा संपदा के आदेश पर कैंट पर उन्हे यहां से हटाकर जयपुर भेजे जाने की सूचना जैसे ही गत रात को नागरिकों को मिली। तो उनमे खुशी की लहर दौड़ गई। और कितने ही लोग एक दूसरे को इसके लिये बधाई देते नजर आए।
कारण कुछ भी रहा हों। कोठी नंबर 210 प्रकरण में सीओ साहब द्वारा समय अनुकूल निर्णय न लिये जाने की बात आज भी कैंट के नियमों को जानने वालों को उच्च स्तर पर होती है उसके बाद भी अपने सहयोगी अनुज सिंह के जेल जाने का कारण किसी न किसी रूप में बनें। सीईओ राजीव श्रीवास्तव के द्वारा जिस प्रकार एक तरफ छावनी के नियमों का पालन कराने के लिये पुराने भवनों और दुकानों आदि के खिलाफ अभियान चलाया गया। दूसरी तरफ समाचार पत्रों में छपने वाली खबरों आदि से छावनी परिषद के आठो वार्डाें में होने वाले अवैध निर्माणों की सूचना पूर्ण रूप से मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई मजबूत अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ न हो पाने पर कार्यप्रणाली पर भी सीईओ की छवि एक अच्छे अधिकारी के रूप में नहीं बना सकें ।
रही सही कसर पिछले दिनों एक व्हाट्स एप गु्रप में महिलाओं की अश्लील फोटो वायरल करने के बाद अपनी सफाई कई प्रकार से दिये जाने के बाद भी सीईओ साहब थाने में होने वाली एफआईआर नहीं रोक सकें।। परिणाम स्वरूप थाना सिविल लाईन में मामला दर्ज हुआ और जांच जारी है।
एक समय में लगभग कोई 4 दशक पूर्व कैंट बोर्ड के सीईओ के रूप में श्री नागपाल द्वारा काफी सख्ती की गई थी लेकिन उसके बाद भी वह जब स्थानातंत्रण होकर गए तो यहां के निवासियों के दिलों में एक अपनी छाप निष्पक्ष कार्रवाई के लिये छोड़कर गए थे। जो स्थानातंत्रण सीईओ राजीव श्रीवास्तव नहीं कर सकें।
दूसरी तरफ जितना जानकारों का कहना है अगर वो सही है तो सीईओ साहब के निरंकुश कार्यप्रणाली की वजह से जेल गए अनुज सिंह। की बहाली के आदेश माननीय न्यायालय से होने की बात खूब सुनाई दे रही है। लेकिन दबी जबान से कर्मचारियों का मौखिक रूप से कहना था कि सीईओ साहब ने उसके बाद भी अनुज सिंह को चार्ज नहीं संभालने दिया।
न्यायालय की कार्रवाई का पालन किया और दूसरे मामले में तुरंत उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी। अपने सहयोगियों के प्रति इस प्रकार के रवैये के लिये भी श्रीवास्तव चर्चाओं में रहें। तो बीते दिनों प्रातःकाल माल रोड व कंपनी बाग में घूमने वाले सीनियर सिटीजन और शहरवासियों से भी उनका विवाद हुआ जिसमे कुछ नागरिकों के खिलाफ एफआईआर हेतु प्रयास भी किये गए थे। वो हुई या नहीं वो एक अलग बात है।
जैसा की आज चर्चा रही कि छावनी बोर्ड में बडे बडे सख्त ओर सर्वगुण संपन्न सीईओ के रूप में तैनात रहें लेकिन इतना विवादित कोई भी अफसर नहीं रहा। हमेशा यह होता दिखाई दिया था कि जब किसी अफसर का स्थानातंत्रण होता था तो अगर कुछ लोग खिलाफ होते थे तो कई उनके अपने भी नजर आते थे। लेकिन नागरिकों के अनुसार श्री श्रीवास्तव से किसी भी आम आदमी को कोई हमदर्दी नजर नहीं आती है। जबकि कैंट को स्मार्ट कहलाने और कई प्रमाण दिलाने का श्रेय श्रीवास्तव को दिया जा सकता था लेकिन कागजों में सबकुछ होने के बाद भी क्षेत्र में गंदगी टूटी सड़के नालों में गंदा पानी आदि से छुटकारा आम आदमी को नहीं मिल सका। इसलिये स्मार्ट कैंट और कई प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी व्यवस्थाओं से यहां के नागरिक सीईओ साहब के कार्यकाल में महरूम रहे।। मेरी निगाह में राजीव श्रीवास्तव कानून के जानकर अफसर थे। लेकिन उनके द्वारा इसका उपयोग अपने क्षेत्र के नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये नहीं किया गया। अगर वो अपनी सोच रचनात्मक लाभ अपने कार्यक्षेत्र के लोगों को उपलब्ध कराने में सफल रहते तो ढाई साल का कार्यकाल न तो कम होता हैै और न ही ज्यादा। स्थानातंरण होना कोई बड़ी बात नहीं।
लेकिन वो इतने विवादों में और वो भी ऐसे जो अगले काफी सालों तक उनका पीछा करते रहेंगे की छांप लेकर यहां से जाने के लिये मजबूर नहीं होतें। जो गया उसकी क्या बुराई और कमियां निकालना यह कहा जा सकता है कि उनके कारण जनता ने जो परेशानियां भुगती है वो तो सहन कर लेगी लेकिन मेरठ छावनी बोर्ड के सीईओ के अपने कार्यकाल के दौरान उत्पन्न हुए हंगामों और ऐसे परेशानियां जिनकी चर्चा यहां नहीं की जा सकती से सबक लेकर राजीव श्रीवास्तव अपने भविष्य की तैनातियों के दौरान कुछ ऐसा जरूर करेंगे जो वहां के नागरिक उनसे खुश नहीं रहे और राजीव श्रीवास्तव भी विवादों की छांप लेकर वहां से नहीं हटेगें। क्योंकि व्हाटसएप गु्रप में महिलाओं की अश्लील फोटो वायर करने का विवाद शायद उनका साथ न छोड़ें।

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लगता यह भी है की बीते दिनों मेरठ हापुड़ से लोकसभा सदस्य श्री राजेन्द्र अग्रवाल द्वारा कैंट बोर्ड से सबंध नागरिक समस्याओं को लेकर देश की रक्षा मंत्री से मुलाकात की गयी थी यह भी हो सकता है की यह स्थानातंरण उसका ही परिणाम हो।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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