Makar Sankranti: जानिए क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति और क्या हैं मान्यताएं

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नई दिल्ली: हमारे देश में makar sankranti के पर्व का व‍िशेष महत्‍व है, जिसे हर साल जनवरी के महीने में धूमधाम से मनाया जाता है. इस द‍िन सूर्य उत्तरायण होता है यानी कि पृथ्‍वी का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है. परंपराओं के मुताबिक इस द‍िन सूर्य मकर राश‍ि में प्रवेश करता है. देश के व‍िभिन्‍न राज्‍यों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इस बार 14 जनवरी को makar-sankranti मनाई जाएगी. आइए आपको बताते हैं makar-sankranti के दिन क्या हैं मान्यताएं और क्यों मनाया जाता है ये त्यौहार…

क्या हैं मान्यताएं
* makar-sankranti के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं.
* मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा जी ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था.
* माना जाता है कि आज से 1000 साल पहले makar-sankranti 31 दिसंबर को मनाई जाती थी. पिछले एक हज़ार साल में इसके दो हफ्ते आगे खिसक जाने की वजह से 14 जनवरी को मनाई जाने लगी. अब सूर्य की चाल के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 5000 साल बाद makar-sankranti फ़रवरी महीने के अंत में मनाई जाएगी.

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* सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने को ‘makar-sankranti’ कहा जाता है. साल 2012 में यह 14 जनवरी की मध्यरात्रि में था. इसलिए उदय तिथि के अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी को पड़ी थी.
* महाराष्ट्र में ऐसा माना जाता है कि makar-sankranti से सूर्य की गति तिल–तिल बढ़ती है, इसीलिए इस दिन तिल के विभिन्न मिष्ठान बनाकर एक–दूसरे का वितरित करते हुए शुभ कामनाएँ देकर यह त्योहार मनाया जाता है.

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क्‍यों मनाई जाती है makar-sankranti?
सूर्यदेव जब धनु राशि से मकर पर पहुंचते हैं तो makar-sankranti मनाई जाती है. सूर्य के धनु राशि से मकर राशि पर जाने का महत्व इसलिए अधिक है क्‍योंकि इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाता है. उत्तरायण देवताओं का दिन माना जाता है. makar-sankranti के शुभ मुहूर्त में स्‍नान और दान-पुण्य करने का व‍िशेष महत्‍व है. इस द‍िन ख‍िचड़ी का भोग लगाया जाता है. यही नहीं कई जगहों पर तो मृत पूर्वजों की आत्‍मा की शांति के लिए ख‍िचड़ी दान करने का भी व‍िधान है. makar-sankranti पर तिल और गुड़ का प्रसाद भी बांटा जाता है. कई जगहों पर पतंगें उड़ाने की भी परंपरा है.

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