मंडलायुक्त जी! अवैध निर्माणों के मामले में आपको गुमराह कर रहे एमडीए के अधिकारी जोन प्रभारी, जेई व ऐईयों की मेहरबानी से बन रहे हैं भव्य काॅमर्शियल व रिहाशी काॅम्पलैक्स

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किंग बेकरी व यूको बैंक तथा टेलीफोन एक्सचेंज के बराबर के निर्माण हैं इसका प्रमाण

मेरठ 11 जनवरी। ब्रहमपुरी निवासी त्रिलोकचंद नामक व्यक्ति द्वारा कमिश्नर मेरठ डा. प्रभात कुमार को एक शिकायती पत्र देकर उनका ध्यान शहर दाल मंडी कबाड़ी बाजार में नितिन कुमार, वरूण कुमार पुत्र अशोक कुमार द्वारा अपनी दुकान के बाहर खाली पड़ी 60 गज
सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिये जाने की बात कहीं गई है। मामले को गंभीरता कोे देखते हुए कमिश्नर द्वारा एमडीए वीसी साहब सिंह वर्मा से इस प्रकरण में मानचित्र स्वीकृत है या नहीं। और सरकारी जमीन घेरी गई है क्या। रिपोर्ट मांगी गई है। दूसरी ओर वीसी साहब सिंह द्वारा जोनल व जेई से उक्त प्रकरण में आख्या मांगी गई है कि इस मामले में क्या होगा क्या नहीं। यह तो एक अलग बात है। एमडीए के इसी जोन के अधिकारियों ने शायद इस शिकायत की ओर से उच्च अधिकारियों का ध्यान हटाने के लिये लिसाडीगेट नूर नगर में हो रहे एक अवैध निर्माण पर सील लगाई। असलीयत क्या है यह तो उच्च स्तर पर जांच का विषय है। लेकिन यह बात किसी से छुपी नहीं है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के अवैध निर्माण से संबंध अधिकारी मेरठ मंडलायुक्त जी का ध्यान अवैध निर्माणों की ओर से हटाने के लिये समय समय पर जब भी कमिश्नर साहब इस संदर्भ में कोई कार्रवाई किसी शिकायत पर करते हैं तो कुछ निर्माण में सील लगाने या बुल्डोजर से दीवार अथवा छज्जा गिराकर उनका ध्यान इस ओर से हटाने के लिये शायद प्रयास करते हैं। सही स्थिति क्या हो सकती है यह तो एमडीए के ऐई जेई व जोन प्रभारी ही जान सकते हैं।
मंडलायुक्त जी यह बात सत्य है कि खासकर अवैध निर्माणों को लेकर होने वाली कार्रवाई के संदर्भ में एमडीए के अधिकारी जहां तक शहर में ऐसे मामलों से संबंध लोगों मे ंचर्चा चलती है उनमे आपको गुमराह करने का कोई भी मौका लिखित व मौखिक रूप से करने में यह बिल्कुल नहीं चूकते लगते हैं।
मंडलायुक्त जी अवैध निर्माणों और सरकारी जमीन घेरे जाने से संबंध प्रकरणों में मुझे लगता है कि एक बार सामूहिक जांच समय सीमा तय करके जरूर कराई जानी चाहिये। जिसके तहत अगर आपने पिछले एक वर्ष में अवैध निर्माणों से संबंध जितनी कार्रवाई करायी है और उनके संदर्भ में प्राधिकरण से रिपोर्ट आयी है उनकी किसी प्रशासनिक अधिकारी से जांच करा लें तो पता चलेगा कि सीधे सीधे या घूमा फिराकर ज्यादातर मामले में त्रुटि पूर्ण रिपोर्ट आपको दी गई मिलेगी।
कश्मिनर साहब जनता को लगता है कि अगर आप जो
निर्माण 3 साल में दर्शाए गए हैं या उन पर सील लगाई गई बताई गई है उनकी जांच मौके पर करा लें। तो एक दो को छोड़कर ज्यादातर तोड़े गए सील लगे निर्माणों में व्यवसाय होते मिलेंगे और वहां लोग रहते मिलेंगे। क्योंकि तोड़ने और सील लगाने की तो सिर्फ रस्म अदायगी विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाती है। मंडलायुक्त जी अगर जिस प्रकार से आवास विकास क्षेत्र के 2215 अवैध निर्माणों के लिये 143 इंजीनियरों को नोटिस दिए गए हैं। उसके ही अनुसार पिछले पांच साल में हुए अवैध निर्माणों के लिये जिम्मेदार जेई, ऐई व जोन प्रभारियों को चिंहित किया जाए तो एक बात विशेष रूप से खुलकर सामने आएगी की लोग सुविधाएं लेकर अवैध निर्माण करा चूके और करा रहे हैं वो सरकार की निर्माण नीति के विरूद्ध अवैध निर्माण कराने के लिये सजा भुगतने की बजाए आज थी मोटा माल कमा रहे बताए जाते हैं।
क्योंकि शहर में आपका डर और आपके द्वारा अवैध निर्माणों व सरकारी जमीन घेरे जाने के विरूद्ध अपनाए जा रहे सख्त रूख के नाम पर निर्माणकर्ताओं को डराकर कितने सही है कितने गलत यह तो जांच का विषय है लेकिन पांच पांच गुना सुविधा शुल्क जो जेई, ऐई आदि द्वारा लिये जाने की चर्चा आम है।
कुछ अवैध निर्माण जिन पर कार्रवाई के आदेश हुए मगर आज भी वो सीना ताने खड़े हैः फिलहाल इस चर्चा को गलत भी नहीं कहा जा सकता। क्योंकि आपके कार्यालय से लालकुर्ती टेलीफोन एक्सचेंज की ओर मुढ़ते ही बिल्कुल सडक पर सभी प्रकार की सरकार की निर्माण नीति का पूर्ण उल्लंघन कर भव्य काॅमर्शियल काॅम्पलैक्स अवैध निर्माण डंके की चोट पर हो रहा है तो इसी थाना क्षेत्र के पीएल शर्मा रोड पर किंग बेकरी के जिस अवैध निर्माण पर सील लगवाई गई थी वो तो ज्यादातर टूट ही गई। मेरठ के इतिहास में इतने बडे अवैध निर्माण के विरूद्ध आपके और पूर्व वीसी के आदेश के बाद भी उसे धराशाही करने तथा पूर्ण निर्माण पर सील लगाने की कार्रवाई आज तक नहीं की गई।
इस रोड पर यूको बैंक के बराबर नीम के हरे पेड़ काटकर हुए निर्माण जिस पर पूर्व में कई बार सील लगाने व कार्यवाही के आदेश वीसी ने दिये मगर अब उसके कुछ निर्माण में शोरूम खुल गया और दूसरे में खुलने की तैयारी चल रही हैै। इस प्रकार तिलक रोड पर गलियों, धुंआधार अवैध निर्माण काॅमर्शियल व फ्लैओं के किये जा रहे हैं। तो दिल्ली रोड स्थित गोपाल गोशाला में भी मुख्य मार्ग पर अवैध निर्माण कराकर एमडीए के अधिकारियों ने वाहन शोरूम खुलवा दिया। कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि कागजी खानापूर्ति के चक्रव्यहू में फंसाकर हर मामले को एमडीए के जेई, ऐई व जोन प्रभारी रूकवाने के बजाए अवैध निर्माण आज भी युद्ध स्तर पर कराने में लगे हुए हैं।
एसीएम, सीओ व थानोंदारों से करायी जाए जांच: कमिश्नर व सिटी मजिस्ट्रेट साहब! अगर नगर में होने वाले अवैध निर्माणों की सत्यता का सच आप जानना चाहे तो समस्त एसीएमओ व पुलिस क्षेत्राधिकारियों तथा थानेदारों से उनके क्षेत्रों में होने वाले अवैध निर्माणों की सूचना मंगवाकर देख सकते हैं। इससे आपको यह भी पता चल जाएगा कि एमडीए के अधिकारी अवैध निर्माण कराने में कितना शामिल है। और किस प्रकार से अपना बैंक बैलेंस और जेब का बोझ बढ़ा रहे हैं। रही बात कार्रवाई की तो आप तो अपने स्तर पर भरपूर प्रयास कर रहे हैं। लेेकिन एमडीए के जो अधिकारी आपके यहां बैठ कर कार्रवाई के बारे में बड़ी बड़ी बताते करते हैं नागरिकों के अनुसार वो ही अवैध निर्माण कराने में भी भूमिका निभा रहे बताए जाते हैं। रही बात सच्चाई की तो वो तो किसी उच्च अधिकारी से जांच कराने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। संवाद सूत्रों व मौखिक चर्चाओं पर आधारित

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