कमिश्नर साहब और सांसद जी शहर का विकास और सौंदर्यकरण तथा उसे स्मार्ट सिटी बनता सब देखना चाहते हैं और उसमे सहयोग देने में भी कोई पीछे नहीं है मगर इससे जुडे कुछ लोग क्या वाकई में शहर का विकास कर पाएंगे

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अपने देश में एक कहावत बड़ी प्रचलित है कि बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना। तथा तु मुझे पंत कहे मैं तुझे निराला। चलता रहेगा। गड़बड़ घोटाला। शहर को स्मार्ट बनाने और जन समस्याओं के समाधान का दावा कर रही सिटीजन फोरम के कुछ कर्ता धर्ताओं पर पूरी तौर पर लागू होती। नजर आ रही है। क्योंकि बीती पांच दिसंबर को शहर के बड़े होटल गड़ रोड स्थित ब्रोड वे में इसका एक विचार गोष्ठी हुई जिसके पहले चरण में मेरठ मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार द्वारा बनाई गई एप की लांचिंग की गई। इस मौके पर अपने संबोधन में मंडलायुक्त ने जो कहा वो बिल्कुल सही और समय अनुकूल था। उनके द्वारा आयोजकों को स्पष्ट रूप से अपने संबोधन में एक आईना भी दिखाया गया। जो सरकार की नीतियों को लागू कराने और जनहित में काम करने के लिये था। मेरठ हापुड़ लोकसभ क्षेत्र के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि सिटीजन फोरम के रूप में शहर को एक अच्छी डाॅक्टरों की टीम मिल गई है। और यह ऐसे डाॅक्टर है जो मर्ज भी पहचानते हैं और इलाज भी। लेकिन मर्ज तभी ठीक होगा जब वो डाॅक्टरों को सहयोग करें । सांसद जी क्योंकि आप अपने क्षेत्र में हर जनसमस्या के समाधान करने वाले राजनेता है। लेेकिन शायद उन्हे यह जानकारी नहीं है कि इन डाॅक्टरों की टीम में ही कुछ ऐसे भी है जिन्होंने इस शहर को कैंसर जैसी बीमारी अपने कथन के विपरीत अवैध निर्माण नाले नालियों पर कब्जा, और अन्य ऐसे ही कार्य शहर को सौंदार्यकरण करने आदि के नाम पर पूर्व में ही दे रखी हैं जो जाम की स्थिति के लिये पूरी तौर पर जिम्मेदार हैं। ऐसे में सांसद जी आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हंै कि जो लोग खुद सरकार की नीतियों के विरूद्ध किसी न किसी रूप में कोई न कोई काम जनहित की आड़ में ऐसा कर रहे हैं उनसे कैसे शहर के सौंदर्यकरण व विकास अथवा शहर को स्मार्ट बनाने में सहयोग की उम्मीद की जा सकती है। इनका कहना है कि सरकारी तंत्र मेरठ सिटीजन फोरम के बिना यह काम पूरा नहीं कर सकतें मेरा मानना है कि शहर को स्मार्ट नहीं अवैध निर्माणों, का जीता जागता उदाहरण इनमे से ही कुछ लोगों ने बना कर रख दिया है और अगर इसकी सत्यता जाननी हो तो सिटीजन फोरम से जुड़े कुछ लोगों के पूर्व में किये गए कार्याें की करायी जाए जांच तो सब कुछ स्पष्ट हो सकता है। रही एप की बात तो वो दो दिन में तो कोई बड़ा करिश्मा कर जनहित में दिखा नहीं पाई। हां अनकहे रूप से सिटीजन फोरम से जुड़े कुछ लोगों ने अपने निहित स्वार्थ सीधे करने के लिये यह प्रपंच सम्मेलन के रूप में रचा। जनता के जागरूक नागरिकों के इस कथन से मैं भी पूरी तौर पर सहमत हूं। एक सम्मेलन में सिटी जन फोरम के मंच से शहर को चलाने की जिम्मेदारी इनके द्वारा ली गई। अपना महानगर सुंदर, हो और इसमे सुनियोजित विकास की लहर चले और हर आदमी को जरूरी सुविधाएं जो सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जा रही है वो प्राप्त हो यह मैं और सब चाहते हैं। जनता का कहना है कि सवाल यह उठता है कि इस सम्मलेन में सबसे आगे विराजमान बिल्डर अशोक गर्ग और ज्ञानेंद्र अग्रवाल, दिखाई दिये। अगर पूर्व में इनके द्वारा विकसित कालोनियों फ्लैटो और काॅमर्शियल काॅम्पलैक्सों को देखा जाए तो पता चलेगा कि 100 में से 50 शासन की नीति के विरूद्ध विकसित की गई हैं ओर मानचित्र कंपाउंड शुल्क पूरा इनके द्वारा जमा नहीं कराया गया बताया जाता है। दूसरी ओर एमडीए के पास रहन रखी जमीन की एवज में विभिन्न प्रकार के शुल्क जमा कर उसे छुड़ाने की बजाए अपने ही सोच के अधिकारियों से मिलीभगत कर इनके द्वारा पुराने हापुड़ अड्डे पर स्थित सूर्या प्लाजा का हिस्सा खड़ा कर दिया गया तो बागपत रोड पर फ्लाई ओवर और परतापुर बाइपास रोड के बीच अनेकों अवैध काॅम्पलैक्स बिल्कुल सड़क पर रोड बाइंडिंग अथवा हरित पटटी पर खड़े कर दिए जाने की चर्चा है। सिटी जन फोरम के मुख्य कर्ता धर्ताओं में से एक एमडीए के पूर्व भवन नियंत्रक जागेश कुमार की पूर्व की कार्यप्रणाली की जांच करायी जाए। तो पता चलेगा कि अपने सरकारी कार्यकाल और नौकरी से इस्तीफा देने के उपरांत इनके द्वारा जो मानचित्र पास कराए गए उनके विपरीत बिल्डिंग शहर में बनकर खड़ी हो गइ तो खुद जागेश सारे नियमों को जानने के बाद भी गढ़ रोड पर सरकार की निर्माण नीति के विपरीत सड़क पर शोरूम बनाकर किराये पर उठा चुके हैं बताए जाते हैं। चर्चा है कि दामोदार कालोनी में इनके सहयोग से सीधे सीधे या घूूमा फिराकर कई कालोनियां और काॅम्पलैक्स शासन की निर्माण निति के विपरीत इनके द्वारा खड़े करा दिये गए। कमिश्नर साहब पीपी माॅडल से शहर का विकास हों यह मैं भी चाहता हूं। लेकिन अगर ग्रामीण कहावत भेड की खाल में छुपे भेडियों द्वारा खुद शहर के स्ववच्छता सौंदर्यकरण अभियान और उसे स्मार्ट बनाने के काम में जोक की तरह सेंध लगा रहे जैसे कुछ लोगों को बड़ावा दिया जाएगा। तो जनता जो कह रही है कि ऐसे में इस फोरम के कितने ही लोग इस नाम पर की मंडलायुक्त और सांसद जी से उनके सीधे संबंध है।
नगर निगम एमडीए और आवास विकास के अधिकारियों पर दबाव बनाकर अपने गलत काम साधने का कार्य इनके द्वारा ज्यादा किया जाएगा शहर का विकास सौंदर्यकरण कम। मैं यह नहंी कहता कि सिटीजन फोरम में सारे ही पदाधिकारी व सदस्य एक से हैं लेकिन यह कहने में कोई हर्ज महसूस नहीं हो रहा है कि अगर वाकई में ईमानदारी के साथ टीम बनाकर इसके कुछ सदस्यों के कार्याें की जांच करायी जाए तो कई पर सरकारी जमीन घेरने अवैध निर्माण करने विकास प्राधिकरण और नगर निगम को दिये जाने वाले टैक्स न देने मानचित्र कंपाउंड शुल्क देन में हेरा फेरी करने के साथ ही और भी ऐसे कितने ही कार्य निकलकर सामने आ सकते हैं जिन्हे नियम के अनुकूल ही नहीं कहा जा सकता। मेरा किसी पर आरोप लगाने का इरादा तो नहीं हैै मगर जब अपने शहर व इसके नागरिक के हित की बात सामने जाती है तो मुझे लगता है कि सच सबके सामने आना ही चाहिये।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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