आॅल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन ने की अफसरों से दुव्र्यवहार के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग और उन्हे दी जाए पुलिस सुरक्षा व नीली बत्ती लगाने की इजाजत

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अधिकारियों पर हमला और उनसे अभद्रता करने वालों के

देश के प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद से श्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह तथा अब पिछले लगभग आठ माह से यूपी के सीएम के रूप में योगी आदित्यनाथ द्वारा देश और प्रदेश की कानून व्यवस्था में सुधार और शांति कायम करने एवं भयमुक्त वातावरण में आम आदमी को सांस लेने का मौका उपलब्ध कराने हेतु देश और प्रदेश के जिला व नगर स्तर सहित हर श्रेणी और वर्ग के अफसर को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने और कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कामों के निस्तारण के लिये स्वतंत्र रूप से काम करने की पूरी छूट दी जा रही है। इससे संबंध खबरें आए दिन समाचार पत्रों में पढ़ने तथा आॅन लाईन न्यूज चैनलों, इलैक्टोनिक चैनलों में सुनने और देखने को मिल रही है।
लेकिन माननीय प्रधानमंत्री ओर प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की भावना के तहत काम करने का मौका अफसरों को जिलों नगरों, कस्बों व गांवों में क्यों नहीं मिल रहा है। यह विषय सोचनीय है। अब कोई कहे की हाथी के दांत खाने के ओर दिखाने के ओर वाली कहावत इस मामले में पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। तो वो सही नहीं है अगर ऐसा होता तो यूपी के निकाय स्थानीय चुनाव में प्रदेश में दो नगर निगमों में बसपा के महापौर और नगर पालिका व नगर पंचायत के पदों पर सपा, कांग्रेस, भाजपा व बसपा के अलावा निर्दलियों को जीत कैसे मिल सकती थी।
भारी तादाद में स्थानीय निकायों के पदों पर विजय प्राप्त करने में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी जीते जो इस बात का प्रमाण कहा जा सकता है कि यूपी में सरकार द्वारा निष्पक्ष मतदान करने की छूट आम आदमी को उपलब्ध करायी गई। चुनाव हारने के बाद पेशबंदी के लिये कोई कितने ही आरोप लगा रहे लेकिन यह बात सही है कि अधिकारियों द्वारा ज्यादातर जगहों पर निर्वाचन का काम पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराया ओर जन समस्याओं के समाधान के साथ साथ भाजपा सहित सभी राजनीतिक पार्टियों के लोगों की बात भी कहीं कम तो कहीं ज्यादा सुनी ही जा रही है।
उसके बाद भी प्रदेश में जगह जगह बड़े छोटे अधिकारियों के साथ मारपीट और दुव्यवहार भाजपा के सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं द्वारा किया जाना उचित नहंी कहा जा सकता। क्योंकि एक तो इससे सरकार और दूसरे भाजपा दोनों ही कहीं न कहंी बदनाम और विवादित हो रही हैं। जबकि सरकार और भाजपा दोनों में से किसी का इरादा हठधर्मिता व दबंगाई दिखाकर अफसरों से काम कराने का नजर नहीं आता हैं उसके बाद भी बिजनौर में भाजपा विधायक द्वारा एक अखबार में छपी खबर के अनुसार नूरपुर के थानाध्यक्ष के साथ दुव्र्यवहार फोन पर किया गया। तो आज एक खबर पढ़ने को मिली की किसी मुददे को लेकर कुछ लोगों ने डीएम को घेर लिया। जिसे पुलिस अधिकारियों ने बडी मुश्किल से वहां से निकाला। बरेली में पीसीएस अधिकारी राजेश कुमार के साथ भाजपा के जिला अध्यक्ष द्वारा मारपीट किये जाने जैसी खबरें निंदनीय हैं। इस घटना को लेकर प्रदेशभर के पीसीएस अधिकारियों में रोष बना हुआ हैं जगह जगह उनके द्वारा बैठक कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
मुझे लगता है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और उप्र भाजपा अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे तथा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जी को प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने और सरकार की जनहित की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने एवं अधिकारियों का मान सम्मान कायम रखने के लिये बरेली की घटना के लिये दोषी भाजपा के जिला अध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर सहित अधिकारियों के साथ अभद्रता करने वाले हर व्यक्ति के विरूद्ध चाहे वो किसी भी दल से संबंध या कितना ही बड़ा क्यों न हों। समय रहते कार्रवाई की जानी चाहियें ।
आॅल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन द्वारा अधिकारियों के साथ की गई अभद्रता की निंदा करते हुए दोषियों को उनके पदों से का निष्कासित करने और अफसरों को निर्भिक होकर काम करने का भरोसा दिलाने के लिये भविष्य में इस प्रकार की घटना न हो वह इन्हे पुलिस सुरक्षा जैसी मुख्य मांग है। मैं भी पूरी तौर पर समर्थन करता हूं। और प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा के बड़े नेताओं से आग्रह करता हूं कि अधिकारियों में व्याप्त रोष आगे बढ़े और उनमे अंसतोष की भावना पनपे इससे पहले अफसरों पर हमले और अभद्रता की सभी घटनाओं के लिये दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। क्योंकि यह अफसर जनता से संबंध मामलों के निस्तारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और अगर इन्होंने अपने साथ होने वाले दुव्र्यहार से संगठन स्तर से निपटने के लिये निर्णय लें लिया तो फिर हर काम प्रभावित हो सकता है। क्योंकि इनके साथ सचिवालय से लेकर जिलों में तैनात कर्मचारी और अराजपत्रित अधिकारी भी आ सकते हैं। ऐसा न हों इसलिये सरकार जनहित में जल्द से जल्द कार्रवाई करने के साथ ही पीडित अफसरों के संगठन पीसीएस संवर्ग के प्रतिनिधियों को बुलाकर वार्ता कर मामले का निस्तारण जल्द किया जाए। बताते चले की ऐसे प्रकरणों को लेकर तमाम जिलों में पीसीएस अधिकारी बैठकें कर रहे हैं।
बीती 4 दिसंबर को मेरठ में हुई बैठक में भाजपा नेता व उसके साथियों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग का समाचार इस प्रकार है। मतगणना के दिन अधिकारियों से की गई अभद्रता व मारपीट की घटना को लेकर जिला प्रशासन के अधिनस्त अफसरों ने बैठक की और भाजपा के नेता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कमिश्नर डा. प्रभात कुमार, जिलाधिकारी समीर वर्मा, को लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया। इसके साथ ही उमेश प्रताप सिंह अध्यक्ष उप्र राज्य सिविल सेवा संघ लखनउ व मुख्य सचिव उप्र शासन लखनउ को भी लिखित पत्र भेजा। बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी मेरठ मुकेश चंद, अपर जिलाधिकारी आनंद कुमार, एसीएम गुलशन कुमार, अपर नगर मजिस्ट्रेट अमिताभ यादव, उपनिदेशक मंडी पुष्पराज सिंह, एसडीएम सरधना राकेश सिंह, एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव, सिटी मजिस्टेट एमपी सिंह सहित तमाम अधिकारियों ने इस घटना की निंदा की। आरोप है कि जिला बरेली में तैनात पीसीएस अधिकारी राजेश कुमार के साथ भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर ने अपने समर्थकों के साथ मतगणना डयूटी के दौरान सार्वजनिक रूप से गाली गलौंच करते हुए हमला किया था। जिसमें वह अपनी जान बचाकर भागे। वहीं अधिकारियों ने भाजपा नेता व उसके साथियों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की है। क्योकि प्रशासनिक अफसरों को शांति व कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए कई मौकों पर भीड़ के बीच जाना पड़ता है और कभी कभी अनियंत्रित भीड़ अफसर को पहचान ना पाने की वजह से भी हमला कर देती है या उन्हे घेर लेती है इसलिए प्रशासनिक अफसरों को पुर्ण पुलिस सुरक्षा पुलिस वालों की भांति उपलब्ध कराने की साथ साथ वाहन पर नीली बत्ती लगाने की अनुमति भी दी जाये।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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