अगर कोई महिला कार चलाए तो ऐसा नहीं होगा कि कार न चले : सेल्वी

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नई दिल्ली : दक्षिण भारत की पहली महिला टैक्सी ड्राइवर के रूप में मशहूर सेल्वी अपनी जिंदगी में लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ती जा रही हैं। उनकी कहानी एक डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा है जिसकी समीक्षकों ने भी प्रशंसा की है। बेंगलुरू की पेशेवर ड्राइवर ने कहा कि महिला होना उनके लिए कभी भी एक बाधा नहीं रही।

सेल्वी ने ईमेल के जरिए दिए साक्षात्कार में कहा, मैंने कभी यह नहीं माना कि महिला होने के नाते मैं कुछ भी करने में सक्षम नहीं हूं। अगर कोई व्यक्ति चावल पकाए तो ऐसा नहीं होगा कि चावल ना पके। इसी तरह अगर कोई महिला ड्राइवर सीट पर बैठे तो ऐसा नहीं हो सकता कि कार ना चले। उन्होंने कहा, यह इस बारे में है कि आप लिंग आधारित कोई भी सीमाओं और बाधाओं को स्वीकार नहीं करते और अपना शोषण होने से इनकार कर देते हैं।

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मेरी कहानी अपरंपरागत कौशल को सीखकर अन्याय से लड़ने और इस कौशल को अपनी जिंदगी का आधार बनाने की कहानी है। चौदह साल की उम्र में शादी करने के लिए मजबूर की गई सेल्वी ने 18 साल की उम्र में इस खराब रिश्ते से बाहर निकलने की हिम्मत जुटाई। वर्ष 2004 में ड्राइविंग सीखते हुए वह कनाडाई डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता एलिसा पलोस्की से मिली।

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एक घंटे 18 मिनट लंबी फिल्म ड्राइविंग विद सेल्वी में एलिसा ने वर्ष 2004 से 2014 तक सेल्वी के जीवन के बारे में बताया है। सेल्वी ने कहा कि जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं तो उन्हें अपनी यात्रा पर भरोसा नहीं होता। सेल्वी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षो में वह अपने आप को लेकर आत्मविासी हो गई है अपनी कहानी को साझा करने से उनकी जिंदगी को एक नया मकसद मिल गया है। फिल्म के निर्माता महिला सशक्तिकरण के लिए भारत में सेल्वी बस टूर का आयोजन कर रहे हैं।

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