ऑफिस में यौन उत्पीड़न लंबी अवधि की समस्या

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वॉशिंगटन: विशेषज्ञों का कहना है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न लंबी अवधि की समस्या है जो मनोवैज्ञानिक क्षति पहुंचा सकती है।शोध में पता चला कि यौन उत्पीड़न का मुख्य लक्ष्य महिलाएं होती हैं लेकिन कई बार पुरुषों को भी इस तरह के व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

‘‘अमेरिकन साइकोलाजिकल एसोसिएशन’ के अध्यक्ष एंटोनियो ई पुइन्ते ने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न करने वाले हमेशा वरिष्ठ हों ऐसा जरूरी नहीं है, सहकर्मी, कनिष्ठ, ग्राहक और क्लाइंट भी ऐसा कर सकते हैं। पुइन्ते ने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न नौकरी संबंधी मनोवैज्ञानिक समस्या है।

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उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक शोध ने कार्यस्थल उत्पीड़न के बारे में और इससे रोकने या कम करने के तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हालांकि उत्पीड़न करने वालों के बारे में बहुत सीमित शोध उपलब्ध है जो इस बारे में पूर्वानुमान लगाना मुश्किल बनाता है कि ऐसा कौन करेगा और यह कब और कहां हो सकता है।

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एपीए के ‘‘जर्नल ऑफ आक्यूपेशनल हेल्थ साइकोलाजी’ में छपे शोध के अनुसार, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का अनुभव करने के बाद पुरु षों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव नजर आते हैं। इन प्रभावों में बेचैनी, अवसाद, खानपान संबंधी विकार, मादक पदार्थ और शराब की लत, तनाव और खुशी का एहसास कम होना शामिल है।

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