चीन के सामने चार लोकत्रांतिक शक्तियों का गठबंधन!

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नई दिल्ली: अगला सप्ताह भारतीय कूटनीतिज्ञों व रणनीतिकारों के लिए खासा गहमा-गहमी भरा होगा। ऐसा होना लाजिमी है, क्योंकि भारत को कूटनीति की बिसात पर दुनिया की दिग्गज शक्तियों के साथ सामंजस्य बिठाना है।एक तरफ अमेरिका की अगुआई में जापान-आस्ट्रेलिया के साथ गठबंधन में शामिल होने के लिए भारत को अपनी रजामंदी देनी है तो दूसरी तरफ पुराने मित्र देश रूस और पड़ोसी देश चीन के साथ भी एक अलग गठबंधन की बात करनी है।

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अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया की सरकारों के प्रमुखों के साथ भारत की शीर्ष स्तरीय वार्ता संभवत: अगले महीने होगी। दुनिया के तमाम कूटनीतिक जानकार इसे चीन के बढ़ते असर को थामने के लिए चार बड़े लोकत्रंतिक देशों के गठबंधन के तौर पर देख रहे हैं। इसमें शामिल होने का प्रस्ताव अमेरिका के साथ जापान भी दे चुका है।

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विदेश मंत्रलय पहले ही यह साफ कर चुका है कि वह चार देशों के इस गठबंधन में शामिल होने के विचार के खिलाफ नहीं है, लेकिन भारत अपने पुराने मित्र रूस और पड़ोसी चीन के साथ रिश्तों को लेकर बेपरवाह भी नहीं हो सकता। ऐसे में रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ भारतीय विदेश मंत्री की बैठक जल्द से जल्द करवाने की कोशिश की जा रही है।

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