झिझकें नहीं, बच्चों को गुड टच, बैड टच के बारे में बताएँ…

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आजकल विभिन्न स्कूलों में बच्चों के साथ यौन शोषण की खबरें आम हो गयी हैं। तमाम कड़े से कड़े कानून मौजूद होने के बावजूद लोगों के मन में लगता है भय रह ही नहीं गया है। युवतियों और महिलाओं पर ही भड़काऊ कपड़े पहनने का आरोप लगा देने वालों को इस बात का जवाब तो देना ही चाहिए कि चार-पांच साल की बच्चियां स्कूल ड्रेस में कहां से भड़काऊ लगती हैं कि उन्हें भी नहीं बख्शा जाता है। निर्भया मामले के बाद जिस तरह देश भर में आंदोलन हुए और जागरूकता लाने के कार्यक्रम हुए उससे लगा कि महिलाओं के प्रति सोच में सुधार आया है लेकिन ढाक के वही तीन पात नजर आते हैं।

लड़कियां ही नहीं लड़के भी हो रहे शिकार

मानसिकता कितनी विकृत होती जा रही है इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि स्कूल के अंदर ही पांच साल की बच्ची से रेप हो जाता है। कथित रूप से स्कूल के अंदर ही सात साल के लड़के से यौन शोषण का प्रयास होता है और विरोध करने पर उसकी हत्या तक कर दी जाती है। अभी पिछले दिनों ही दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया जो बच्चों को ही यौन शोषण का शिकार बनाता था।

करने होंगे उपाय

स्कूलों में सेक्स शिक्षा देने की मांग यदा-कदा उठती रहती है, इस पर अमल हो पाता है या नहीं या फिर कब होता है यह तो समय ही बतायेगा लेकिन फिलहाल इतना तो किया ही जा सकता है कि हम अपने बच्चों को इस बारे में जागरूक करें ताकि वह स्कूल में या बाहर इस बात का अंदाजा लगा सकें कि कौन उन्हें बुरी नजर से देख रहा है या गलत इरादे से छूने की कोशिश कर रहा है। यकीन जानिये यदि हम बच्चों को इस बारे में जागरूक करेंगे तो आगे उन्हें कभी भी किसी के शोषण का शिकार नहीं होना पड़ेगा। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही उपायों पर-

-अकसर हम टीवी देखते समय किसी प्रकार के अंतरंग दृश्य आने पर या फिर यौन शोषण के दृश्य आने पर टीवी बंद कर देते हैं या फिर बच्चों को इधर उधर भेज देते हैं। ऐसा करने की बजाय हमें उन्हें वह देखने देना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें यह बात आसानी से समझ आती है कि गुड टच और बैड टच में क्या अंतर होता है।

-यदि यौन शोषण से जुड़े किसी केस को टीवी पर दिखाया जा रहा है तो उसे भी बच्चे को देखने दे सकते हैं ताकि बच्चा यह समझ सके कि ऐसी परिस्थिति में खुद को कैसे बचाना है या कैसे मदद हासिल करनी है।

-अपने बच्चे के दोस्त बन कर रहें। यदि आप उन्हें डांटते फटकारते ही रहेंगे तो वह कभी आपको अपनी बातें शेयर नहीं करेंगे। बच्चों से स्कूल के सहपाठियों, टीचर या स्टाफ आदि के बारे में जानकारी लेते रहें। क्लास के अलावा स्कूल में वह किन-किन एक्टिविटी में भाग लेता है और किस-किस टीचर से उसका वास्ता होता है यह सब जानकारी भी रखें।

-अक्सर स्कूल कार्यदिवसों के समय में अभिभावकों को स्कूल परिसर के अंदर नहीं आने देते हैं इसलिए अगली बार जब भी पीटीएम में जाएं तो स्कूल के प्रवेश द्वार से लेकर बच्चे की कक्षा तक के रास्तों का खुद मुआयना करें और देखें कि सभी जगह सुरक्षित हैं या नहीं। बच्चों के टॉयलेट का भी हाल देखें और वहां से कोई बाहरी रास्ता हो तो इस बारे में स्कूल में अपनी आपत्ति दर्ज करायें।

-आप स्कूल बस में आने वाले ड्राइवरों और कंडक्टरों की पहचान सत्यापित कराई गई है या नहीं इस बारे में स्कूल से जानकारी ले सकते हैं।

-स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरा हैं या नहीं और उसकी रिकॉर्डिंग हो रही है या नहीं इस बारे में भी स्कूल से जानकारी हासिल कर सकते हैं।

-अगर आपका बच्चा प्ले स्कूल में है या नर्सरी में है तो यह देख लें कि स्कूल में उनके लिए अलग से वॉशरूम है या नहीं।

-बच्चे को अकेले बैठा कर बातें समझाने से अच्छा है कि काम करते करते समय समय पर उसे सीख देते रहें जैसे उसे नहलाते समय यह बता सकते हैं कि प्राइवेट पार्ट को किसी को नहीं छूने देते हैं या ना ही किसी को दिखाते हैं।

-अकसर लोग छोटे बच्चे को लेकर गोदी में बिठा लेते हैं और उसे चूमने लग जाते हैं। अपने बच्चे के अंदर शुरू से ही इस बात का विरोध करने की बात डालें क्योंकि किसके मन में क्या चल रहा है यह आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता।

-किसी शादी या पार्टी में जाएं तो खुद दोस्तों के बीच पूरी तरह व्यस्त न हो जाएं। बच्चों का ध्यान रखें क्योंकि सिर्फ सूनसान ही नहीं भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी अकसर शोषण होने की घटनाएं सामने आती हैं।

-कभी कहीं बाहर जाना हो और बच्चों को घर पर छोड़ना हो तो किसी महिला को भी घर पर छोड़ कर जाएं और बीच-बीच में बच्चों से बातें करते रहें।

-बच्चे को विपरीत परिस्थिति में अपने को बचाने और मदद हासिल करने के तरीकों के बारे में बताते रहना चाहिए। पता नहीं आपके द्वारा दिया गया कौन-सा टिप कब उसके काम आ जाये।

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