दूध उत्पादक राष्ट्रों में भारत पहले स्थान पर

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नई दिल्ली 11 जुलाई। केंद्र सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि भारत 1998 से विश्व के दूध उत्पादक राष्ट्रों में पहले स्थान पर है। यहां विश्व की सबसे बड़ी गोपशु आबादी है। भारत में 1950-51 में दूध का उत्पादन 17 मिलियन टन था, जो 2015-16 में बढ़कर 155.49 मिलियन टन हो गया था। देश में उत्पादित दूध का लगभग 54ः घरेलू बाजार में विपणन के लिए अधिशेष है, जिसमें से मात्र 20.5ः ही संगठित सेक्टर द्वारा क्रय कर प्रसंस्.त किया जाता है। अधिक दूध के उत्पादन व दुग्ध किसानों के हित में इस प्रतिशत को बढ़ाना होगा। स्पष्ट है कि बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए (2021-22 तक 200-210 मिलियन एमटी तक होने का अनुमान है) देश को ग्राम स्तर पर, विशेष रूप से दूध की खरीद और उच्च मूल्य वाले दूध उत्पादों के उत्पादन के लिए अवसंरचना के उन्नयन की आवश्यकता है। लक्ष्य ग्रामीण दूध उत्पादकों की पहुंच बढ़ाकर संगठित दूध प्रसंस्करण तक करने का है ताकि उनकी आय बढ़ सके। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग ने डेयरी विकास के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना का प्रारूप तैयार किया है, जिसमें थोक मिल्क कूलिंग, प्रसंस्करण अवसंरचना, मूल्य संवर्धित उत्पाद (वीएपी) सहित दूध शीतन सुविधाओं का सृजन शामिल है। इन्हीं कारणों से केन्द्र सरकार ने अगले पांच वर्षो तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य के अनुरूप ‘‘सहकारिताओं के माध्यम से डेयरी व्यवसाय-राष्ट्रीय डेयरी अवसंरचना योजना’ के लिए जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी से ऋण प्राप्त करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस परियोजना का कुल परिव्यय 20,057 करोड़ रुपए है।

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