धर्मशाला में ठंडी हवाओं के बीच लें पर्यटन का मज़ा

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एक पुरानी फिल्म का मशहूर गीत है ठंडी हवाएं, लहरा के छाएं…। खूबसूरत हिल स्टेशन धर्मशाला जब आप पहुंचेंगे तो प्राकृतिक छठा के बीच झरने के बीच ठंडी हवा के झोंके पाकर आप भी यह गीत गुनगुना उठेंगे। वाकई छुटि्टयों में सैर के लिए यह बेहतरीन जगह है, जहां आप घने जंगल तो पाते ही हैं, बर्फबारी का भी आनंद लेते हैं। यहां का शांत वातावरण असीम सुकून देता है। यहीं पर है दलाई लामा का आश्रम स्थल। देवदार और पाइन के घने वृक्ष के साथ मैदानी इलाका और बेहतरीन स्नोलाइन कुल मिलाकर धर्मशाला को एक शानदार प्राकृतिक स्थल बनाती है।

धर्मशाला काफी चौड़े भाग में है। मगर यह दो हिस्से में बंटा है। निचला धर्मशाला 1350 मीटर में फैला है। यह व्यस्त व्यापारिक केंद्र है। ऊपरी धर्मशाला 1830 मीटर में है। जिसके साथ उपनगर मैकलियोडगंज और फोरसीथगंज है। उन्नीसवीं सदी में धर्मशाला को ब्रिटिश शासक लार्ड एलगिन ने अपनी आरामगाह बनाया था। संत जॉन नामक चर्च यहां के बीहड़ों में स्थित है। धर्मशाला में बड़ी संख्या में तिब्बती लोगों ने भी अपने घर बना रखे हैं। यहां कई तरह के प्राचीन मंदिर आप देख सकते हैं। जैसे ज्वालामुखी, वृजेश्वरी और चामुंडा।

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धर्मशाला में कई दर्शनीय स्थल हैं, जैसे मोनेस्ट्री और म्यूजिक। प्राचीन शहर और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य धर्मशाला को आकर्षक बनाते हैं। यहां की हर ऋतु अपने आप में खास है। शहर की शुरुआत में ही आप वार मेमोरियल देख सकते हैं। इसे कांगड़ा आर्ट म्यूजियम भी कहते हैं। यहां कोतवाली बाजार में आप पांचवीं सदी की कला और दस्तकारी को देख सकते हैं। कांगड़ा की प्रसिद्ध पेंटिग्स, मूर्तिकला, मिट्टी के बरतन और मानव−विज्ञान से संबंधित चीजें आपको इस बाजार में देखने को मिल जाएंगी। इस बाजार के ठीक नीचे पुस्तकालय है।

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धर्मशाला से 11 किलोमीटर दूर है डल झील, जो चारों तरफ से देवदार के वृक्षों से घिरी है। यह मनोरम पिकनिक स्पॉट है। आठ किलोमीटर की दूरी पर है धर्मशाला का खूबसूरत संत जॉन चर्च। इसे खूबसूरत स्टोन से बनाया गया है, जो देवदार की छाया में खूबसूरत लगती है। 1863 में लार्ड एलगिन की मृत्यु धर्मशाला में हुई तो उनकी कब्र भी यहीं बना दी गई। मैकलियोडगंज को छोटा ल्हासा भी कहा जाता है। यहीं दलाई लामा का आश्रम है, जिसमें बुद्ध के जमाने की झलक दिखती है।

धर्मशाला से 11 किलोमीटर की दूरी पर भागसुनाथ प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट है। धर्मकोट कांगड़ा घाटियों के ऊपर है। यहां से प्रकृति का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। धर्मशाला का मौसम एक समान नहीं होता। सर्दियों में जमा देने वाला तापमान होता है। इसलिए अगर आप ठंड में यहां बर्फ गिरते देखना चाहते हैं, तो गरम कपड़े ले जाएं। गर्मियों में जहां धर्मशाला का तापमान सामान्य होता है, वहीं मानसून के दौरान यहां जम कर बारिश होती है। जनवरी से फरवरी तक आप यहां स्नोफॉल का मजा ले सकते हैं। यहां तिब्बतियों द्वारा मनाया जाने वाला नया वर्ष देखने लायक होता है। धर्मशाला का दिन जहां चमकदार होता है, वहीं रातें काफी सर्द होती हैं। धर्मशाला आप हवाई मार्ग और सड़क यातायात के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं।

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