बदल रहा है पटना, पर्यटक भी हो रहे हैं हैरान`

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पटना के नए स्वरूप को देख कर आश्चर्य होता है। चौड़ी सड़कें, नए बस स्टाप और अपार्टमेंट के साथ मॉल्स एक बारगी पुराने लोगों का ध्यान खींच लेते हैं। ऐसा लगता है कि सांस्कृतिक धरोहरों को समेटे यह शहर नई करवट ले रहा है। अपने समृद्ध प्राचीन इतिहास का इसे बोध है, इसीलिए जहां इस शहर ने अपनी विरासत को संजोया है, वहीं आधुनिकता से कदमताल करता हुआ अपने को फिर से संवार भी रहा है। अब यह दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले शहरों में से एक है। इसके आसपास स्थित पर्यटक स्थल को देखने विश्व भर से लोग आते हैं, तो यहां की परम्परा और संस्कृति के रंग को देख कर चमत्कृत हो जाते हैं।
बिहार की राजधानी पटना विश्व के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है। प्राचीन पटना पाटलीपुत्र के नाम से जाना जाता था जो मगध राजाओं की राजधानी हुआ करती थी। लगभग 300 बीसी से यहां मौर्य साम्राज्य हुआ करता था। आज का आधुनिक पटना गंगा नदी के दक्षिण किनारे पर बसा हुआ है। यह शहर कई और नदियों को अपने में समेटे हुए है जैसे सोन, गंडक और पुनपुन। जून 2009 में विश्व बैंक ने कारोबार’ के मामले में दिल्ली के बाद पटना को दूसरे नंबर पर बताया था।

पटना को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले शहरों में 21वां स्थान मिला है। पटना के आसपास कई महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल हैं, जैसे- वैशाली, राजगीर, नालंदा, गया, बोधगया और पावापुरी। इन जगहों पर आप हिंदू, जैन और बौध धर्म की छाप देख सकते हैं। पटना सिखों का भी पवित्र स्थान माना जाता है। सबसे आखिरी सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म इसी जगह हुआ था।

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पटना शहर पर्यटकों का मुख्य आकर्षण केंद्र है। खासकर बोधगया के प्रति विदेशी पर्यटकों का काफी झुकाव रहता है। यहां की सांस्कृतिक धरोहरों की बात करें तो कई प्राचीन जगह और इमारतें देखने लायक हैं। कुम्हरार और अगमकुआं सम्राट अशोक के समय की धरोहर हैं, जो आज जर्जर अवस्था में हैं। दीदारगंज याक्षी मौर्यकला का उदाहरण प्रस्तुत करता है। तख्त श्री पटना साहिब सिखों के पांच मशहूर तख्तों में से एक हैं और सिखों के दसवें गुरु ‘गुरु गोविंद सिंह जी’ का जन्म स्थान भी है। इसके अलावा पटना में पांच और गुरुद्वारे हैं।

पादरी की हवेली, पटना हाईकोर्ट, गोलघर और सचिवालय आदि भी ब्रिटिश कला का बेजोड़ नमूना हैं।

पटना का इतिहास भी काफी रोचक है। पुत्ररका नाम के राजा ने अपनी पत्नी पताली के लिए इस शहर को बसाया और नाम दिया पतालीग्राम। जब रानी की पहली संतान हुई तब इसका नाम पतालीपुत्र रखा गया। इतिहास की बात करें, तो मगध का राजा अजातशत्रु अपनी राजधानी राजगहा को एक नई जगह लाना चाहता था और उसने इस जगह को चुना। जब इस शहर को बनाया गया तब इसका नाम पतालीग्राम ही था। कुछ साल बाद इसे पाटलीपुत्र कहा गया। जीवन के आखिरी दिनों गौतम बुद्ध ने भी कुछ साल यहीं बिताए थे। उस वक्त उन्होंने इस शहर के बेहतर भविष्य की भविष्यवाणी की थी।

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दूसरी किवंदती के अनुसार यहां मौजूद हिंदू देवी ‘पटल देवी’ के नाम पर इस शहर का नाम पटना पड़ा। लगभग 12वीं शताब्दी में यहां बख्तियार खिलजी का राज्य शुरू हुआ था और उस वक्त यहां प्राचीन शिक्षा केंद्रों को तहस-नहस किया गया। बंगाल विभाजन के बाद 1912 में पटना बिहार की राजधानी बनी। पटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी अपनी हिस्सेदारी का गवाह बना। खासकर चम्पारण आंदोलन और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन। आजादी के बाद भी पटना बिहार की राजधानी बनी रही जबकि बिहार ने एक बार फिर विभाजन का दर्द झेला, जब झारखंड उससे अलग हो गया।

पटना में देखने लायक बहुत कुछ है। जैसे हनुमान मंदिर। यह पटना स्टेशन के पास है। मंगलवार और शानिवार को यहां भक्तों की लम्बी कतार देखी जा सकती है। पटना प्लानेटोरियम एशिया का सबसे बड़ा तारामंडल है, जिसे देखने स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी पर्यटक भी आते रहते हैं। श्रीकृष्ण साइंस सेंटर जिसे 1978 में बनवाया गया, इसे भी लोग देखने जाते हैं। खासकर स्कूली बच्चे। हर साल लगभग यहां दो लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं। पटना का चिड़ियाघर संजय गांधी जैविक उद्यान भी आकर्षण का केंद्र है। एक जनवरी 2013 से बिहार सरकार ने यहां खाने पीने की वस्तु अंदर ले जाने पाबंदी के साथ आपराधिक तत्वों पर अंकुश लगाने की पहल की है।

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यहां मौजूद गोलघर अंग्रेजों का सबसे पुराना निर्माण है। पटना म्यूजियम में स्टोन और ब्रोंज के स्तूप देखे जा सकते हैं। 1489 में बंगाल शासक अलाउद्वीन हसानी शाह का बनवाया बेगू हज्जान, मकबरा देखने लायक है। इसके अलावा शहीद स्मारक, मनेर शरीफ, फुलवारी शरीफ, मोइन-उल-हक स्टेडियम, पत्थर की मस्जिद, किला हाउस, सदाकत आश्रम, पादरी की हवेली, बांकीपुर क्लब, कांग्रेस मैदान, दरभंगा हाउस, गांधी मैदान, अनुराग सेवा सदन, करगिल चौक, नागोल कोठी और दानापुर कैंट देखने लायक हैं।

पटना के लिए रेल, सड़क और हवाई यातायात का इस्तेमाल किया जा सकता है। दिल्ली से राजधानी एक्सप्रेस के अलावा, मगध श्रमजीवी और संपूर्णक्रांति एक्सप्रेस सहित कई रेलगाड़ियां पटना जाती हैं। यहां जाने का सबसे बेहतरीन मौसम है फरवरी से अप्रैल तक। मई-जून में यहां बहुत गर्मी पड़ती है। जुलाई से सितम्बर तक का महीना मानसून का होता है।

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